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'सना' एक ऐसी युवती की कहानी है जो कामुकता, अहंकार, लालच व स्वार्थ के लिए किसी का भी प्रयोग करना जानती है। अपने प्रेमी चन्दन, विवाह के पश्चात् अपने पति के मित्र रेवती प्रसाद व अपने ही स्कूल के प्रधानाचार्य मोहन अक्षय के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर सना आधुनिकता के नाम पर किस सीमा तक गिर सकती है, उपन्यास की विषयवस्तु यही प्रतिपादित करती है। सिल्की और कैटी के नवीन के साथ अवैध सम्बन्धों के माध्यम से उपन्यासकार ने कॉर्पोरेट दुनिया की सच्चाई को बखूबी चित्रित किया है टिया जैसे लघु पात्र अपने चारित्रिक पतन के कारण अपने ही छात्रावास के छात्र/छात्राओं के सामने नैतिक साहस नहीं जुटा पाते हैं। अंततः, उपन्यास आधुनिक जीवन की सच्चाई है
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