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जीवन की निष्ठुर वास्तविकता ही नहीं, जीवन के यथार्थ की सार्थक अभिव्यक्ति को पाठकों की सूक्ष्म चेतना में उकेरने में सिद्धहस्त हैं प्रयोगधर्मी ओड़िआ कथाकार बिजय नायक।
ओड़िआ संस्कृति की मनोभूमि पर अटल रहकर मानववाद के अनंत आकाश में फैलते चले जाना ही इस बहुचर्चित कथाकार की रचनाधर्मिता की विशेषता है। इस संग्रह की एक-एक कहानी पाठक का महज मनोरंजन नहीं करेगी, पाठक की महान उपलब्धि में परिणत होगी, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है। बिजय नायक की चुनी हुई इक्कीस कहानियों का यह पहला खूबसूरत गुलदस्ता 'अरण्य रोदन' हिंदी में प्रकाशित होने के अवसर पर मैं यह कहना चाहूंगी कि भाषाएं भले ही आंचलिक हों, पर साहित्य सार्वजनिक होता है। मुझे पूरा विश्वास है कि ओड़िआ हिंदी के जाने-माने अनुवादक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा अनूदित ओड़िआ कथाकार बिजय नायक की ये कहानियाँ हिंदी के सुधी पाठकों को अवश्य पसंद आएंगी। - प्रतिभा राय (पद्मभूषण व ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात कथाकार)
इस कहानी संग्रह में मेरी इक्कीस चुनी हुई कहानियां शामिल हैं। मैं पिछले पांच दशकों से ओड़िआ में कहानियां लिख रहा हूं। ये कहानियां ओड़िआ की प्रसिद्ध पत्र - पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित भी होती रही हैं। अब तक मेरे ग्यारह कहानी संग्रह और एक उपन्यास ओड़िआ में प्रकाशित हैं। लेकिन मेरी ओड़िआ कहानियों का हिंदी अनुवाद पिछले तीन-चार वर्षों से ही संभव हो पाया है।
कथावस्तु की विविधता, ग्रामीण और प्राकृतिक पृष्ठभूमि के प्रति अनुराग, आधुनिक घटना प्रवाह, मूल्यबोध का जयगान और जीवनानुराग इन संगृहीत कहानियों के आधार हैं। प्रेम से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीवन संघर्ष से लेकर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण तक इन कहानियों का फलक विस्तारित है। इसके अलावा उत्कंठा और शब्