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"समझौते और सपने" एक भावनात्मक, प्रेरणादायक और रिश्तों से जुड़ी कहानी है, जो एक औरत की खामोश लड़ाई, टूटते रिश्तों, समाज की सोच और नई शुरुआत की ताकत को दिखाती है।
कहानी की शुरुआत सान्वी से होती है, जो शादी के बाद एक ऐसे परिवार में आती है जहां बाहर से सब सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर हर इंसान अपने अतीत, डर और अधूरे रिश्तों से जूझ रहा होता है। हवेली, पुराने राज़, परिवार के टूटे हुए रिश्ते और अजय की खामोश जिंदगी धीरे-धीरे सान्वी को एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहां प्यार भी है, दर्द भी, और कई अनकहे सच भी।
अजय एक ऐसा इंसान है जो अपने अतीत के घावों से बाहर नहीं निकल पा रहा। दूसरी तरफ सान्वी हमेशा सबको संभालते-संभालते खुद को भूलती चली जाती है। दोनों की जिंदगी में गलतफहमियां, पुराने रिश्तों के सच, परिवार का दबाव और समाज की सोच बार-बार मुश्किलें खड़ी करते हैं। लेकिन इन्हीं संघर्षों के बीच दोनों एक-दूसरे को समझना सीखते हैं।
कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, बल्कि उन औरतों की भी है जो सालों तक चुप रहकर सब सहती रहती हैं। सान्वी जब गांव की महिलाओं के लिए "समझौते और सपने महिला शिक्षा केंद्र" शुरू करती है, तब उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। वहां आने वाली हर औरत अपने अंदर एक टूटा हुआ सपना लेकर आती है- कोई पढ़ना चाहती है, कोई अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है, तो कोई सिर्फ अपनी पहचान ढूंढना चाहती है।
समाज का विरोध, लोगों की सोच, डर, ताने और रिश्तों की मुश्किलों के बावजूद सान्वी हार नहीं मानती। धीरे-धीरे उसकी छोटी सी कोशिश कई महिलाओं की जिंदगी बदलने लगती है। मीरा जैसी डरी हुई औरत आत्मविश्वासी बनती है, छोटी छवि अपने सपने देखना सीखती है, और कई महिलाएं पहली बार समझती हैं कि जिंदगी सिर्फ समझौते करने के लिए नहीं होती।
कहानी में प्यार है, दर्द है, परिवार है,
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